Diabetes from the lens of Astrology

by M.S.Shrivastava - Published on March 1987

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The entire article is divided in 2 parts first part give you a brief about he disease and the second part explains the astrological point of view. The main cause of this diabetes is due to the inactivation of beta cells in gastric pancreas.

Beta cells provide the insulin needed to digest the sugar that goes into the body with food. After these cells become inactive, the sugar in the body, without being digested, comes out in urine and increases the sugar levels in blood.

This disease may lead to cataracts, blood disorders, renal failure, weakness, blood pressure and other illness. This disease affects mental stability as well as the whole body. The effect of mental instability affects every side of life, whether it is the economic side or marital happiness.

What are the causes and symptoms of diabetes?

Improper and imbalanced food eating habits, not doing proper workout, addiction to cigarette alcohol and mental stress are few main causes of this disease. In general, this disease is commonly found in professions which involves long hours of sitting without movement, people in pressure jobs, journalists, lawyers, professors.

In addition to frequent urination, there is no pain due to diabetes in the beginning. Slowly one has to get up at night. The amount of urine increases. Along with excess hunger and thirst one feels increase in headaches, constipation and dryness. The body seems to be impaired and hunger dies, and the weight of the body gets reduced. The sugar in urine increases so much that the white matter starts appearing on the ground and so the ants starts gathering.

Astrological discussion of diabetes

In the view of astrology, each of the part of body is related to some planets. Therefore, It is appropriate to say that by studying those planets and their malfunctioning of metabolic system will give to diabetes.

Now let’s see the planets and their associated body parts -

1. Pancreas are in abdomen and abdomen is ruled by Sun so we can say Sun is also the ruler of pancreas

2. Mercury represents stomach and intestines

3. Insulin is transported by the blood throughout the body and due to its area, it can be associated with Jupiter

4. Insulin stimulates the liver to store glucose in the form of glycogen. Liver is denoted by the fifth house in a horoscope and Liver and Jaundice are ruled by Saturn therefore Saturn can be one of the factors

5. Sugar in blood and water is regulated reabsorbed by kidneys. The kidney is associated to planet Venus.

According to the above Sun, Mercury, Jupiter, Saturn and Venus are the main factors while studying diabetes in a horoscope. These planets in conjunction with malefic planets or have an aspect from malefic planets is an indicator of diabetes.

From astrological point of view, studying the horoscope can help in predicting diabetes in advance.

The following yoga’s or planetary positions in the horoscope indicate diabetes.

1. The conjunction of Sun, Saturn, Venus in the fifth house

2. Sun in first house (Lagna house i.e. 1st house in D1 chart), Mars in seventh or tenth house with Venus and aspect by Saturn

3. Ascendant Venus is associated with the Sun and the planet Mars of the tenth house is with Saturn or has an aspect from Saturn

4. Jupiter and Venus should have an aspect or should be in conjunction with malefic planets and there should be a malefic planet in the eighth house

5. The Moon and Jupiter should be in 8th house in conjunction with malefic planets

6. Venus and Jupiter are conjunct with malefic planets and a malefic planet in the lagna house.

7. Rahu is in the 8th house in conjunction with the lord of 8th house or both Rahu and lord of 8th house are in the trine (1st, 5th or 9th house)

8. Mercury is situated in the house of Jupiter and has an aspect from Mars

9. If Guru and Venus are in the 1st, 5th or 6th house and are in conjunction or have an aspect from malefic planets

When the above-mentioned planetary positions are there in the horoscope, the Dasha or Antar Dasha of the planet indicates that there are high chances of diabetes to appear.

Treatment of diabetes

- In Ayurveda, for the treatment of diabetes, it is said to use the seeds of Jamun, leaves of Gudmar, and wood of Vijaysar tree (Indian Kino).

- In dietary medicine, one can eat breads made from gram, wheat, barley or multigrain and vegetables such as Cholai(Amaranthus in English), Spinach, Bathua (Chenopodium), fenugreek, cauliflower, peas, bitter gourd, Parwal (pointed gourd), Turnip, and Cabbage vegetable are beneficial.

- Moong bean (green lentils), Masoor (orange lentils), gram (yellow split peas) and split pigeon peas should be eaten.

- Eating bread made by mixing fruits of peepal tree with wheat flour or eating a peepal fruit in anyway will be very effective

Mitigation by gemstones

- Wearing a white coral of 4-5 ratti (1 ratti = 0.91 carats) in silver or gold ring in gems is beneficial in diabetes. For early patients, wearing a lajward (lapis lazuli) ring is beneficial. - -

Apart from this, chanting mantras, donating and holding gems of the planet due to which the disease has occurred, also benefits

Keeping purity of thoughts, one should walk around barefoot at your praying place that is Dev-sthan and walking barefoot at pilgrimage places. Regular walks are also beneficial.

One should consult an Ayurveda doctor in case of opting for ayurvedic treatment.

Thank you.

MS Shrivastava

(50+ years of experience in Vedic Astrology)

ज्योतिष की दृष्टि में मधुमेह रोग - श्री एम एस श्रीवास्तव-मार्च १९८७

मधुमेह रोग को अंग्रेजी भाषा में डायबिटीज के नाम से जाना जाता है। इस रोग का मुख्य कारण अमाशय स्थित पेनक्रियाज (pancreas) में बीटा सेल्स (beta cells) कोशिकाओं की निष्क्रियता के कारण होता है। बीटा सेल्स भोजन के साथ जो शर्करातत्व देह में जाते हैं उन्हें पचाने हेतु आवश्यक इंसुलिन प्रदान करते हैं। इन कोशिकाओं के निष्क्रिय हो जाने पर देह में शक्कर बिना पचे रहकर मूत्र द्वारा निकलती है और रक्त में भी शर्करातत्व बढ़ जाते हैं। इस रोग के कारण मोतियाबिंद, रक्त धमनियों के विकार, गुर्दे की खराबी, कमजोरी, रक्तचाप असंतुलन (blood pressure) आदी हो जाते हैं । इस प्रकार यह रोग मानसिक अस्थिरता और संपूर्ण देह को प्रभावित करता है। मानसिक अस्थिरता का प्रभाव जीवन के प्रत्येक पक्ष को प्रभावित करता है, चाहे वह आर्थिक पक्ष हो या दांपत्य सुख।

published in Jeevan Vaibhav Magzine, March 1987

मधुमेह के कारण और लक्षण

आहार-विहार की असंयमितता, उपयुक्त परिश्रम न करना सिगरेट शराब आदि व्यसन, मानसिक तनाव ही इस रोग का मुख्य कारण है। मधुमेह के शिकार दुकान या दफ्तर में अधिक बैठने वाले, चिंतन शील, दिमागी काम करने वाले, लेखक, पत्रकार, वकील, प्राध्यापक अधिक होते हैं।

बार बार पेशाब आने के अतिरिक्त प्रारंभ में मधुमेह के कारण कोई कष्ट नहीं होता। धीरे-धीरे रात्रि को अधिक उठना पड़ता है। पेशाब की मात्रा अधिक बढ़ती है। भूख प्यास की अधिकता के साथ सिर दर्द, कब्ज, खुश्की, बढ़ती है। शरीर क्षीण होने लगता है। भूख मर जाती है शरीर का वजन कम हो जाता है।पेशाब में शुगर इतनी बढ़ जाती है कि भूमि पर सफेद पदार्थ दिखने लगते हैं जिस पर चींटे इकट्ठे होने लगते हैं।

मधुमेह का ज्योतिषीय विवेचन

ज्योतिषशास्त्र की दृष्टि में मधुमेह रोग के लिए शरीर में जिन क्रिया केंद्रों का योगदान है उनके ग्रह की खामियों को इस रोग का कारक समझना उचित होगा।

१. अमाशय की स्थिति उदर में होने के कारण उदर का प्रतिनिधि सूर्य।

२. आमाशय व आंतों का प्रतिनिधि बुद्ध।

३. इंसुलिन का परिवहन रक्त द्वारा संपूर्ण शरीर में होता है उसका क्षेत्र बृहस्पति होने के कारण गुरु कारक हो सकता है।

४. इंसुलिन कार्बोहाइड्रेट को आवश्यकता के लिए यकृत में संचित रखता है।यकृत का कुंडली में पंचम भाव है और यकृत तथा पीलिये पर शनि का अधिकार होने से शनि भी कारक हो सकता है।

५. रक्त में शर्करा और जल गुर्दों द्वारा प्रथक की जाती है। गुर्दों का कारक ग्रह शुक्र होता है।

उपरोक्तअनुसार सूर्य, बुध, गुरु, शनि एवं शुक्र मधुमेह रोग के कारक होते हैं। यह ग्रह पाप ग्रहों की युति में हो या दृष्टि संबंध होने पर मधुमेह का संकेत देते हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से जन्म कुंडली का अध्ययन कर मधुमेह रोग का अनुमान पूर्व में ही लगाया जा सकता है ।

जन्म कुंडली में निम्नलिखित ग्रह योग मधुमेह रोग के संकेत करते हैं।

१. पंचम भाव में सूर्य, शनि, शुक्र, की युति होना

२. लग्न में सूर्य, मंगल सप्तम अथवा दशम भाव में शुक्र के साथ हो तथा शनि से दृष्ट हो।

३. लग्नेश शुक्र की सूर्य से युति हो और दशम भाव का मंगल शनि से युक्त अथवा दृष्ट हो।

४. गुरु और शुक्र पाप ग्रहों से दृष्ट अथवा युक्त हो और अष्टम भाव में कोई पाप ग्रह स्थित हो।

५. चंद्र गुरु अष्टम भाव में स्थित हो और पाप ग्रहों से युक्त हो।

६. शुक्र और गुरु पाप ग्रहों से युक्त हो और लग्न में कोई पाप ग्रह बैठा हो।

७. राहु अष्टम भाव के स्वामी के साथ अष्टम भाव अथवा त्रिकोण में स्थित हो।

८. बुध गुरु के भाव में स्थित होकर मंगल से दृष्ट हो।

९. गुरु और शुक्र लग्न पंचम छठे भाव में पाप ग्रहों से युक्त अथवा दृष्ट हो तो मधुमेह रोग होता है।

उक्त वर्णित ग्रह योग कुंडली में होने पर पाप ग्रहों अथवा रोग कारक ग्रह की दशा अंतर्दशा में रोग प्रारंभ होता है।

मधुमेह रोग का उपचार

- आयुर्वेद शास्त्र में मधुमेह रोग के उपचार के लिए जामुन के बीज, गुड़मार की पत्ती, विजयसार की लकड़ी का प्रयोग बताया गया है।

- आहार चिकित्सा में चना, गेहूं, जौ (अर्थात बेजड़) के अनाज की रोटी खाना चाहिए। चौलाई, पालक, बथुआ, मेथी, गोभी, मटर, करेले, परवल, शलजम, गांठ गोभी की सब्जी भी लाभकारी है।

- मूंग, मसूर, चने, अरहर की दाल ख़ानी चाहिए। पीपल के फल गेंहू के आटे में मिलाकर रोटी खाने अथवा किसी भी प्रकार एक फलों को खाने से मधुमेह रोग जड़ से नष्ट हो जाता है।

रत्नों में सफेद मूंगा ४-५ रत्ती का चांदी अथवा सोने की अंगूठी में धारण करने से मधुमेह रोग में लाभ होता है। प्रारंभिक रोगियों के लिए लाजावर्त अंगूठी में धारण करने से लाभ होता है।

इसके अतिरिक्त जिस ग्रह के कारण रोग की प्रवृति हुई हो उसका मंत्र जाप, दान व रत्न धारण करने से भी लाभ होता है।

विचारों की शुद्धता रखकर देवस्थान व तीर्थ स्थानों की पैदल नंगे पांव परिक्रमा करना चाहिए। नित्य भ्रमण भी लाभकारी है। आयुर्वेद आयुर्वेदिक उपचार वह दे आठवां चिकित्सक के परामर्श से करना उचित होगा।


एम एस श्रीवास्तव

(50+ years of experience in Vedic Astrology)

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